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Friday, March 10, 2017

भारत की आधुनिक भाषाओं के विकास का महत्त्व: राम विलास शर्मा



साभार: गूगल इमेज 

"सामन्ती व्यवस्था के ह्रास के साथ भारत की आधुनिक भाषाओं का उत्थान जुड़ा हुआ है। ये भाषाएं सामन्ती व्यवस्था के ह्रास के कारण पैदा नहीं हुईं, भाषाएं पहले से थीं, उन्हें अब प्रसार और विकास का अवसर मिला। संस्कृत जहाँ धर्म और साहित्य की भाषा थी, फ़ारसी जहाँ राजभाषा थी, वहाँ उत्तर भारत के सन्त कवि बोलचाल की भाषाओं को माध्यम बना कर आगे बढ़े। संस्कृत या फ़ारसी की जगह अनेक भाषाओं के विकास से भारत की एकता टूटी नहीं, वह और दृढ़ हुई, क्योंकि जनता की शिक्षा और उसका सांस्कृतिक विकास उसकी भाषा द्वारा ही सम्भव है। सुशिक्षित और सुसंस्कृत जनता ही एकता का सबसे दृढ़ आधार है। इसीलिए जो लोग अंग्रेजी या संस्कृत द्वारा भारत की एकता बनाये रखना चाहते हैं, वे जनता की शक्ति नहीं पहचानते। जो लोग बंगाल या महाराष्ट्र में बंगाली या मराठी के बदले हिन्दी को शिक्षा का माध्यम बनाना चाहते हैं, वे भारत की आधुनिक भाषाओं के विकास के महत्त्व को नहीं समझते, वे इन भाषाओं द्वारा जनता के शिक्षण और सांस्कृतिक विकास का मूल्य नहीं  पहचानते। जिस समय संस्कृति द्वारा एकता की रक्षा करने वाले पराजित हो चुके थे, उस समय बोलचाल की भाषाओं द्वारा ही भक्त कवियों ने जनता के जातीय आत्मसम्मान को जगाया था और उसकी रक्षा की थी। इस ऐतिहासिक क्रम-विकास को रोकना आज किसी के सामर्थ्य में नहीं है।"
राम विलास शर्मा 
राम विलास शर्मा (संस्कृति और जातीयता)

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