नवोत्पल में आपका स्वागत है...!

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नवोत्पल ने तकरीबन छः माह पहले एक अभियान शुरु किया था, जिसमें कवि की किसी एक रचना पर सहज टीप के साथ साझा करने का प्रयास है। साहित्य जिसमें सहित का प्राण सन्निहित है, वह जब-तब एक्सक्लुसिव हो निष्प्राण ना होने लगे; यह सोचा गया कि-सबसे लोकप्रिय विधा कविता पर टिप्पणियां ली जायें, जो सहज हों एवं स्वाभाविक हों। 

सामूहिक प्रयासों से आप सभी के शुभ प्रेरणाओं से आज पचीसवीं प्रविष्टि आपके समक्ष है.

इन पच्चीस हफ़्तों में निश्चित ही नवोत्पल को असीमित प्रेम प्रोत्साहन प्राप्त हुआ है जिसका नवोत्पल परिवार आभारी है और हमेशा ही उन शुभाशाओं का आकांक्षी रहेगा. 







2 comments:

  1. बहुत से ब्लॉग किसी कवि की कविता (या 4-5 कवितायें) प्रस्तुत करते हैं और कुछ सभी कविताओं पर एक छोटी सी टिप्पणी के साथ इन कविताओं को अपने ब्लॉग पर जगह देते है। लेकिन किसी पाठक को सहज या विशेष रूप से कोई एक ही कविता पसंद आई हो या फिर ऐसा भी तो हो सकता है ना कि किसी रचनाकार ने कुल एक ही कविता लिखी हो !!! ये एक कविता ही अपने बहुत से आयामों और बिम्बों की वजह से बहुत कुछ कहना चाह सकती है। और कोई पाठक उस पर ही अपनी बात कहना चाहे तो ?
    उसी एक कविता पर एक टिप्पणी के साथ कविता को ब्लॉग पर स्थान देने का विचार नवोत्पल समूह को आया, और फिर थोड़ी हिचक और संकोच के साथ शुरुआत भी की गयी ।
    जब शुरुआत हुई तब हम सभी इसकी सफलता के लिए आशान्वित थे , लेकिन मन के गहरे भीतर छुपी हुई आशंकाएं भी थीं । कई बार ऐसा लगा कि शायद हम समय पर कविता प्रस्तुत नहीं कर पाएंगे , लेकिन तभी किसी न किसी मित्र और शुभचिंतक ने हमे उबार लिया और देखते ही देखते हम सिल्वर जुबिली पर पहुँच गए वो भी बिना किसी अंतराल के ।
    व्यक्तिगत रूप से मैं उन सभी कवियों का आभारी हूँ जिन्हों ने हमारे मांगे जाने पर अपनी कविता हमे सहर्ष दी , विशेष रूप से आभारी उन टिप्पणीकारों का हूँ जो टिप्पणी लिखने को न सिर्फ मान गए, बल्कि समय पर टिप्पणियाँ भी दीं । (तमाम मनुहार के बाद माने कवियों और टिप्पणीकारों का भी धन्यवाद ।)
    टीम नवोत्पल को भी हार्दिक शुभकामनायेँ ।

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    1. आपकी प्रेरणा व साहचर्य अहम हैं भैया

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